पुण्य तिथि पर याद किए गए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंथी नर्तक देवदास बंजारे

भिलाई (देवांगन टाइम्स)। छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंथी नर्तक देवदास बंजारे की याद में भिलाई के आमदी नगर हुडको स्थित अगासदिया परिसर में पुण्य स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। ज्ञातव्य है कि श्री बंजारे का दुर्ग से रायपुर जाते समय सड़क दुर्घटना में वर्ष 2005 में 26 अगस्त को निधन हो गया था।
उनकी पुण्य स्मृति में आयोजित समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा सहित अनेक साहित्यकारों, लोक कलाकारों और प्रबुद्ध जनों ने देवदास बंजारे से जुड़ी यादों को साझा किया और छत्तीसगढ़ की पंथी नृत्य को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाने में उनके योगदान को सराहा।
प्राचीन और दुर्लभ वाद्य यंत्रों के ख्यातिप्राप्त संग्रहण कर्ता रिखी क्षत्रिय ने मांदर वादन और महंत अंतराम ने पंथी गीत का गायन किया। रिखी क्षत्रिय ने सात अलग अलग विधाओं की धुनों को मांदर बजाकर समां बांध दिया।

डॉ. परदेशीराम वर्मा ने अपने उद्बोधन में देवदास के व्यक्तित्व और उनकी पंथी नृत्य कला पर प्रकाश डाला । उन्होंने बताया कि उनके द्वारा रचित देवदास बंजारे की जीवनी आरूग फूल को 1999 में मध्यप्रदेश शासन का प्रतिष्ठित "सप्रे सम्मान" मिला था। देवदास बंजारे 64 विदेशी मंचों पर अपनी विशिष्ट शैली की पंथी कला का जादू बिखेरा था। गुरू बाबा घासीदास जी के अमर संदेश को उन्होंने दुनिया भर में आकर्षक पंथी नृत्य के माध्यम से फैलाया।

बहुआयामी संस्था "सृजन" के संस्थापक अध्यक्ष घनश्याम देवांगन ने कहा कि देवदास बंजारे एक महान कलाकार थे। पंथी नृत्य को लोकप्रिय बनाने एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें चेटुवा (लिमतरा) ग्राम में आयोजित "पंथी प्रसंग समारोह" में तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक विजय शंकर चौबे की गरिमामय उपस्थिति में "सृजनश्री" अलंकरण प्रदान कर सम्मानित किया गया। राकेश गुप्ता रूसिया ने कहा कि मैंने देवदास बंजारे के अद्भुत नृत्य को तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी जी के कार्यकाल में देखा था। देवदास महान कलाकार थे। विनायक अग्रवाल ने कहा कि देवदास कबड्डी के भी प्रख्यात-खिलाड़ी थे। बाद में अपनी पंथी नृत्य कला के कारण विश्व प्रसिद्ध हुए ।
शरद कोकास ने कहा कि देवदास बंजारे ने साक्षरता अभियान में भी सहयोग किया था। वे छत्तीसगढ़ के सच्चे सपूत थे। रिखी क्षत्रिय ने देवदास की सरलता और विनम्रता का उल्लेख किया और विभिन्न मंचों में उनके साथ में दिए कार्यक्रमों की प्रस्तुतिकरण को याद कर भावुक हो उठे। साहित्यकार बद्रीप्रसाद पारकर ने कहा कि देवदास बंजारे जैसा पंथी नर्तक दूसरा नहीं हुआ। अरूण अग्रवाल ने कहा कि देवदास बंजारे ने छत्तीसगढ़ का गौरव देश विदेश में फैलाया। कवि अब्दुल कलाम ने आभार व्यक्त करते हुए देवदास के सरल व्यक्तित्व की विशेषताओं के बारे में बताया।



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