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कविताएं : दो जून की रोटी

  • gkdewangan18
  • 18 hours ago
  • 1 min read

दो जून की रोटी अर्थात दो वक्त की रोटी जुटाना मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकता होती है।

इसी पर केन्द्रित घनश्याम कुमार देवांगन की दो कविताएं प्रस्तुत हैं -


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