देवांगन समाज के आदि ग्रंथ देवांगन पुराण की दुर्लभ दो पांडुलिपियों को शासन ने किया संरक्षित : कथावाचक पंडित संतोष राव का शासन ने किया सम्मान
- gkdewangan18
- May 18
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भिलाई (देवांगन टाइम्स) : भारत सरकार की ज्ञान भारतम योजना के तहत देश की प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित करने का काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में रायपुर जिला के खरोरा नगर पंचायत के निवासी एवं प्रसिद्ध कथावाचक 76 वर्षीय पंडित संतोष राव के पास संरक्षित देवांगन पुराण (परमेश्वरी पुराण) की दो दुर्लभ पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम पोर्टल में दर्ज कर संरक्षित किया गया।
देवांगन पुराण कथा के प्रवचन कर्ता पंडित संतोष राव के पास माता परमेश्वरी से संबंधित "देवांगन पुराण" की दो पांडुलिपियां हैं :
(1) 350 वर्ष पुरानी पांडुलिपि : भोजपत्र पर लिखित, 101 पृष्ठ
(2) 100 वर्ष पुरानी पांडुलिपि : 151 पृष्ठ
ये दोनों पांडुलिपियां पीढ़ियों से उनके परिवार द्वारा सुरक्षित रखी गई हैं। भोजपत्र पर लिखी 350 वर्ष पुरानी पांडुलिपि धार्मिक आस्था के साथ ही विशेष रूप से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर विगत दिनों प्रशासनिक अमला पंडित संतोष राव के निवास पहुंचा। उन्होंने उक्त दुर्लभ पांडुलिपियां का अवलोकन किया और ज्ञान भारतम ऐप में उनकी पूरी जानकारी, फोटो और विवरण अपलोड किया। ज्ञान भारतम योजना का उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण कर उन्हें भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित करना है। दुर्लभ पांडुलिपियों को सहेज कर रखने के लिए शासन की ओर से एसडीएम आशुतोष कुमार देवांगन, तहसीलदार खरोरा चंद्रशेखर मंडई, अतिरिक्त तहसीलदार सूर्यकांत कुंभकार और सीएमओ खरोरा ओमप्रकाश सिंह ने पंडित संतोष राव को शाल व श्रीफल देकर सम्मानित किया।

उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व परमेश्वरी भवन भिलाई में आयोजित एक भव्य समारोह में देवांगन जन कल्याण समिति भिलाई नगर के तात्कालीन अध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन एवं टीम के द्वारा पंडित संतोष राव जी को देवांगन पुराण एवं माता परमेश्वरी की कथा प्रवचन कर उनकी महिमा को कथा प्रवचन के जरिए जन-जन तक पहुंचाने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित "परमेश्वरी सेवा रत्न अलंकरण" प्रदान कर सम्मानित किया जा चुका है। देवांगन पुराण में देवांगन समाज की कुलदेवी माता परमेश्वरी का पृथ्वी पर अवतरण एवं उनके द्वारा आदि पुरुष दीपचंद एवं आदि माता हरिणी की उत्पत्ति, उनका विवाह, वंश वृद्धि, गोत्रों की उत्पत्ति, वस्त्र निर्माण, राक्षसों का संहार, माता परमेश्वरी की आराधना एवं पूजा विधि आदि प्रसंगों का विस्तृत विवरण मिलता है। इस सम्पूर्ण कथा प्रसंग को प्रवचन कर्ता अपने रोचक शैली में देवांगन पुराण कथा के धार्मिक आयोजन के अवसर पर मधुर संगीत के साथ श्रद्धालुओं एवं भक्तों को सुनाते हैं।

शासन की ओर से उनका सम्मान करते हुए एसडीएम आशुतोष देवांगन ने कहा कि यह खरोरा क्षेत्र के लिए गौरव की बात है कि भारत की अमूल्य विरासत को यहां के नागरिक पंडित संतोष राव एवं उनके पूर्वजों ने इतने वर्षों तक संजो कर रखा हुआ है। यह पांडुलिपियां हमारी संस्कृति, इतिहास और धार्मिक परंपरा का जीवंत दस्तावेज हैं।
पंडित संतोष राव ने बताया कि उनके पूर्वजों ने इन ग्रंथों को संभालकर रखा है। अब शासन की इस पहल से इन पांडुलिपियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और शोधकर्ताओं को भी लाभ होगा। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि पांडुलिपियों के संरक्षण में शासन द्वारा हर संभव मदद किया जाएगा।



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